नीद से आज जब मेरी आखे खुली
उनके यादो के साये में खुली
बाते जब होती है दिल बहुत हँसता है
क्यूकी उनकी नज़रे कही और होती है
हमें मोहब्बत है उनसे उनेहे है मालूम
लकिन उनकी मोहब्बत कही और है
हमें ना तो उनसे सिकबा है ना ही शिकायत
दिल्लगी में होती है हमेशा ऐसी ही हालत
चोट खाने के बाद क्या रखा है
जो एक बार दिल तोड़ दे उससे क्या उमीद रखा है
प्यार हमेशा नहीं मिलता है
जब मिलता है तो क्यू उसे ठुकरा रखा है
उसके यादो में बेठ और इंतजार में क्या रखा है
जिंदगी बहुत लम्बी है
आगे बढ़ने से कदमो को क्यू रोके रखा है
मुझे मालूम है एक दिन छोड़ जयेगी मेरी जिंदगी
हम रोते रहेगे और वो मुस्करा कर जयेगी
हम टूट बिखर जायेगी उनकी यादो में और
वो हंसती रहेगी अपनी मोहब्बत की बाहों में
फिर भी दिल मेरा नहीं सुनता मेरी बात
उनकी यादो में रहना चाहता है मेरी ये शाम
मोत नसीब होगी मुझे उनके प्यार में मालूम है
ये बात उन्हें भी पता है ये भी मालूम है
लकिन हम फिर भी प्यार किये जिए जा रहे है
मोत आने की इंतजार में दिन गिने जा रहे है
छोड़ जिस दिन जायेगी वो मुझे
सायद वो आखरी दिन नसीब हो मुझे
खुदा से है इतनी उमीद मुझे
मोत उसी दिन आये मुझे
No comments:
Post a Comment