Friday, 15 May 2015

ये खुदा दो पल और दे


बीते पल को मनाना है, रूठे कल को मनाना है 
आने बाले पालो में , जो रूठे है उन्हें मनाना है 
ये खुदा मुझे दो पल और दे,, 
जो छुट गये है उन्हें फिर से मनाना है ....!!!!!
जो अपने थे उन्हें फिर से साथ करना है,,,,,,,,
जो ना कभी मुझे जान सके उन्हें फिर से बताना है 
ये खुदा मुझे दो पल और दे.......
जो छुट गये है उन्हें फिर से मनाना है .......!!!!!
कभी जहाँ छा थी आज फिर से धुप लाना है 
कभी जहाँ रात थी आज फिर से सुबह लाना है 
जो मेरे ना हो सके उन्हें किसी और का बनाना है 
ये खुदा मुझे दो पल और दे ......
जो छुट गये है उन्हें फिर से मनाना है...!!!!!!
मुझे अपनों को आज ख़ुशी देनी है 
अपने को आज मुझे हँसाना है 
बीते पल को आज फिर से मनाना है  
जो रूठे है आज फिर से उन्हें मनाना है 
ये खुदा मुझे दो पल और दे ....
जो छुट गये है फिर से उन्हें मनाना है ...!!!!




1 comment:

  1. बहुत अच्छा लगा आपका यह दिल छु लेनेबाला कविता. भगवन आपको और तर्रक्की करते रहने का आशीर्वाद दें.

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